Punjab News गवाह को धमकाने के छह वर्ष पुराने मामले में गैंगस्टर संपत नेहरा को अदालत ने बरी कर दिया है। मामले में शिकायतकर्ता अपने दावे को खारिज कर दिया। अदालत में उसने कहा कि संपत का फोन उसे नहीं आया था। इसके अलावा, उसने संपत नेहरा को कोर्ट में पहचानने से भी इनकार कर दिया। ऐसे में संपत को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट जसप्रीत सिंह ने बरी कर दिया गया।
अदालत ने छह वर्ष पहले गवाह को जानलेवा धमकी देने के मामले में फैसला सुनाया है। गैंगस्टर संपत नेहरा को मामले में जिला अदालत ने बरी कर दिया है। सेक्टर-36 थाना पुलिस ने उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 195ए और 506 के तहत मामला दर्ज किया था। शिकायतकर्ता ने अपने दावे को खारिज कर दिया। अदालत में उसने कहा कि संपत का फोन उसे नहीं आया था। ऐसे में संपत को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट जसप्रीत सिंह ने बरी कर दिया गया।
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Punjab: ये दलील सनसनीवाल ने कोर्ट में दी
वहीं, संपत नेहरा का केस लड़ने वाले एडवोकेट रमन सिहाग और नीरज सनसनीवाल ने कोर्ट में कहा कि पुलिस ने झूठा केस दर्ज किया था। उसने किसी गवाह को धमकाया नहीं था। पुलिस ने शिकायतकर्ता का फोन नंबर ही नहीं बताया।वहीं, शिकायतकर्ता आलम ने अदालत में कहा कि उसने पुलिस से कोई शिकायत नहीं की थी। पुलिस के पास उसकी शिकायत का पेपर इंग्लिश में था, लेकिन वह अंग्रेजी लिखना नहीं जानता था। इसके अलावा, उसने संपत नेहरा को कोर्ट में पहचानने से भी इनकार कर दिया।
Punjab: ये था पूरी बात।
बुड़ैल में होटल चलाने वाले मोहम्मद कलाम उर्फ आलम ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि आठ दिसंबर 2017 में कुछ लड़कों ने उसका अपहरण काली शूटर का नाम लेकर किया था। आरोपित उसे मोहाली में फेंककर उसकी स्कॉर्पियो लेकर भाग गए।
आरोपितों ने उसे दो लाख रुपये देने की पेशकश की। वारदात के एक वर्ष बाद, संपत नेहरा ने उसे फोन किया और धमकी दी कि अगर वह काली शूटर के खिलाफ गवाही देगा तो उसे मार डालेगा।

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